बीसवीं शताबà¥à¤¦à¥€ के आरमà¥à¤à¤¿à¤• काल में संसà¥à¤•ृति à¤à¤µà¤‚ सनातन धरà¥à¤® के उनà¥à¤¨à¤¯à¤¨ à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°-पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤° के उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ से संसà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ शà¥à¤°à¥€ बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤µà¤°à¥à¤¤ सनातन धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤²’ कानपà¥à¤° की पà¥à¤°à¤®à¥à¤– धारà¥à¤®à¤¿à¤• à¤à¤µà¤‚ सांसà¥à¤•ृतिक संसà¥à¤¥à¤¾ है। देश में अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ शासन सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ हो जाने के बाद यà¥à¤—धरà¥à¤® के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ से देश में पाशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥à¤¯ विचारों और पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ का आगमन होने लगा था। इमारा पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ धरà¥à¤® समाज और संसà¥à¤•ृति लमà¥à¤¬à¥€ दासता के कारण विकार गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ हो चà¥à¤•े थे। उनà¥à¤¨à¥€à¤¸à¤µà¥€à¤‚ शताबà¥à¤¦à¥€ के आरमà¥à¤ से ही योरोपियन ईसाइयों ने देश में ईसाई धरà¥à¤® का पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° आरमà¥à¤ कर दिया था। सनॠअटà¥à¤ ारह सौ सतà¥à¤¤à¤¾à¤µà¤¨ की कà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥à¤¤à¤¿ के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ विघटन और विदेशीकरण की लपटें और अधिक तीवà¥à¤°à¤¤à¤¾ से फैलने लगीं। देश में ईसाई धरà¥à¤® का पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤° बॠजाने के कारण, हमारे शà¥à¤°à¥à¤¤à¤¿ समà¥à¤®à¤¤, सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤ªà¤¾à¤¦à¤¿à¤¤ वैदिक धरà¥à¤® की उपेकà¥à¤·à¤¾ होने लगी। अतः ततà¥à¤•ालीन समाज सà¥à¤§à¤¾à¤°à¤• और धरà¥à¤®à¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥à¤¯ इसकी रकà¥à¤·à¤¾, उनà¥à¤¨à¤¯à¤¨ और उतà¥à¤•रà¥à¤· के लिठसनà¥à¤¨à¤¦à¥à¤§ हो गये। अपनी महान संसà¥à¤•ृति के उतà¥à¤¥à¤¾à¤¨ हेतॠइस पà¥à¤°à¤•ार के धारà¥à¤®à¤¿à¤• आनà¥à¤¦à¥‹à¤²à¤¨à¥‹à¤‚ का केनà¥à¤¦à¥à¤° काशी में रहा, फलतः वहां शà¥à¤°à¥€ 108 सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¾à¤¨à¤¨à¥à¤¦ जी नामक महान संत à¤à¤µà¤‚ सनà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥€ ने जगदà¥à¤—à¥à¤°à¥à¤¶à¤‚कराचारà¥à¤¯ के महान ममà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¦à¤°à¥à¤¶à¥‹à¤‚ का अनà¥à¤µà¤°à¥à¤¤à¤¨ करते हà¥à¤ सनातन धरà¥à¤® के सिदà¥à¤§à¤¾à¤¨à¥à¤¤à¥‹à¤‚ पर आधारित à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ समाज की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ को सà¥à¤¦à¥ƒà¥ करने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया, इस कारà¥à¤¯ की सिदà¥à¤§à¤¿ के लिठबीसवीं शताबà¥à¤¦à¥€ का आरमà¥à¤ होते-होते अखिल à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सà¥à¤¤à¤° पर ‘à¤à¤¾à¤°à¤¤ धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤²’ संसà¥à¤¥à¤¾ की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ की गई, जिसकी शाखाà¤à¤‚-पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤–ाà¤à¤‚ शीघà¥à¤° ही समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ देश में खà¥à¤²à¤¨à¥‡ लगीं। ‘à¤à¤¾à¤°à¤¤ धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤²’ के ततà¥à¤µà¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤¨ में संचालित इस धरà¥à¤®à¤¯à¤œà¥à¤ž मं देश के अनेक हिनà¥à¤¦à¥‚ राजाओं-महाराजाओं, जमींदारों और धनाढà¥à¤¯à¥‹à¤‚ का पà¥à¤°à¤œà¥‹à¤° समरà¥à¤¥à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤†à¥¤ महामना पं. मदन मोहन मालवीय सदृश महापà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ की पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ à¤à¤µà¤‚ सहयोग इस धारà¥à¤®à¤¿à¤• à¤à¤µà¤‚ सांसà¥à¤•ृतिक पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¤à¥à¤¥à¤¾à¤¨ के कारà¥à¤¯ अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ को गति मिली।
इस महान धारà¥à¤®à¤¿à¤• आनà¥à¤¦à¥‹à¤²à¤¨ में कानपà¥à¤° ने à¤à¥€ अपना सहयोग पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया। यहाठà¤à¥€ कà¥à¤› धरà¥à¤®à¤¾à¤¨à¥à¤°à¤¾à¤—ी महानà¥à¤à¤¾à¤µ अपने पà¥à¤°à¤•ार धरà¥à¤® à¤à¤µà¤‚ संसà¥à¤•ृति के पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°-पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤° हेतॠतन-मन-धन से समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ हो गये। फलसà¥à¤µà¤°à¥‚प बीसवीं शताबà¥à¤¦à¥€ के पà¥à¤°à¤¥à¤® दशक की समापà¥à¤¤à¤¿ होते-होते नगर में शà¥à¤°à¥€ बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤µà¤°à¥à¤¤ सनातन धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤² की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ हो गयी। सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¾à¤¨à¤¨à¥à¤¦ जी (काशी) के सà¥à¤¯à¥‹à¤—à¥à¤¯ शिषà¥à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ दयाननà¥à¤¦ जी की अगà¥à¤°à¤—णà¥à¤¯ à¤à¥‚मिका में सनॠ1910 ई. में ‘शà¥à¤°à¥€ विकà¥à¤°à¤®à¤¾à¤œà¥€à¤¤ सिंह à¤à¤µà¤‚ शà¥à¤°à¥€ राम देवीपà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ ‘पूरà¥à¤£’ के समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ से सनातन धरà¥à¤® की रकà¥à¤·à¤¾ à¤à¤µà¤‚ उसके पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤° के महान पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किये गये। पà¥à¤°à¤¥à¤® विशà¥à¤µ यà¥à¤¦à¥à¤§ समापà¥à¤¤ होने के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ रायबहादà¥à¤° बाबू विकà¥à¤°à¤®à¤¾à¤œà¥€à¤¤ सिंह के नेतृतà¥à¤µ में सनातन धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤² के कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ का विसà¥à¤¤à¤¾à¤° होने लगा। सनॠ1917 में सनातन धरà¥à¤® à¤à¤µà¤¨ निरà¥à¤®à¤¿à¤¤ कराया गया तथा सनातन धरà¥à¤® के पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° के लिठअनेक महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ à¤à¤µà¤‚ धारà¥à¤®à¤¿à¤• आयोजनों का आयोजन होने लगा। महामणà¥à¤¡à¤² की नींव जिन सà¥à¤¤à¤®à¥à¤à¥‹à¤‚ पर निरà¥à¤®à¤¿à¤¤ हà¥à¤ˆ उनमें पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के वरिषà¥à¤ अधिवकà¥à¤¤à¤¾ राय बहादà¥à¤° विकà¥à¤°à¤®à¤¾à¤œà¥€à¤¤ सिंह, सà¥à¤ªà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ अधिवकà¥à¤¤à¤¾, कवि और साहितà¥à¤¯à¤•ार शà¥à¤°à¥€ राय देवी पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ ‘पूरà¥à¤£’, साहितà¥à¤¯à¤•ार पं. पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ª नारायण मिशà¥à¤° पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¤¾à¤¯à¥€ रायविशमà¥à¤à¤°à¤¨à¤¾à¤¥, धरà¥à¤®à¤¨à¤¿à¤·à¥à¤ पं. दà¥à¤°à¥à¤—ापà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ बाजपेयी आदि पà¥à¤°à¤®à¥à¤– थे। अपने जनà¥à¤® काल से आज पà¥à¤°à¤¥à¤® शताबà¥à¤¦à¥€ के समापन तक यह सनातन धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤² शैकà¥à¤·à¤¿à¤• उनà¥à¤¨à¤¯à¤¨, धरà¥à¤® पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°, चिकितà¥à¤¸à¤¾ सेवा इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ के लिठसमरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं के माधà¥à¤¯à¤® से अपने पावन उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯à¥‹à¤‚ की पूरà¥à¤¤à¤¿ हेतॠसतत पà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨à¤¶à¥€à¤² है। शिकà¥à¤·à¤¾ के पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°-पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤° तथा à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति के अनà¥à¤°à¥‚प गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ पूरà¥à¤£ शिकà¥à¤·à¤¾ के लिठउसकी खà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ में ही नहीं वरनॠसमà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ देश में फैल गई है।
सनातन धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤² का कारà¥à¤¯ तीन à¤à¤¾à¤—ों में विà¤à¤•à¥à¤¤ है-
1: शिकà¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°
2: चिकितà¥à¤¸à¤¾
3: धरà¥à¤® पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° कारà¥à¤¯
शिकà¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° - ‘देश में पà¥à¤°à¤µà¤°à¥à¤¤à¤¿à¤¤ होने वाले नवजागरण के अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤—त नूतन-पदà¥à¤§à¤¤à¤¿ की शिकà¥à¤·à¤¾ में सनातन मानव धरà¥à¤® की शिकà¥à¤·à¤¾ को à¤à¥€ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ दिया जाये, जिससे हमारी सांसà¥à¤•ृतिक कà¥à¤·à¤¤à¤¿ न हो तथा हम अपनी पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ गौरवपूरà¥à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ परमà¥à¤ªà¤°à¤¾à¤“ं की दिवà¥à¤¯ जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ को अखणà¥à¤¡ रूप में जागà¥à¤°à¤¤ रख सकें। इस उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ से सनातन धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤² के अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤—त शिशॠककà¥à¤·à¤¾ से लेकर महाविदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ सà¥à¤¤à¤° तक अनेक शिकà¥à¤·à¤£ संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं के माधà¥à¤¯à¤® से संसà¥à¤•ारसमà¥à¤®à¤¤ शिकà¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करने का गà¥à¤°à¥à¤¤à¤° दायितà¥à¤µ समà¥à¤¯à¤•ॠरूप से संचालित किया जा रहा है। शà¥à¤°à¥€ बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤µà¤°à¥à¤¤ सनातन धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤² दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ संचालित शिकà¥à¤·à¤£ संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं की समाज में अपनी विशिषà¥à¤Ÿ पहचान है। पà¥à¤°à¤®à¥à¤– शिकà¥à¤·à¤£ संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं के नाम निमà¥à¤¨à¤µà¤¤à¥ उलà¥à¤²à¤¿à¤–ित हैं -
1. सनातन धरà¥à¤® विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯, मेसà¥à¤Ÿà¤¨ रोड, कानपà¥à¤°
2. विशà¥à¤µà¤®à¥à¤à¤° नाथ सनातन धरà¥à¤® इणà¥à¤Ÿà¤°à¤®à¥€à¤¡à¤¿à¤à¤Ÿ कालेज, चà¥à¤¨à¥à¤¨à¥€à¤—ंज, कानपà¥à¤°
3. विकà¥à¤°à¤®à¤¾à¤œà¥€à¤¤ सिंह सनातन धरà¥à¤® महाविदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯, नवाबगंज, कानपà¥à¤°
4. पं. दीनदयाल उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ सनातन धरà¥à¤® विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ इणà¥à¤Ÿà¤° कालेज, नवाबगंज, कानपà¥à¤°
5. बी.à¤à¤¨.à¤à¤¸.डी. शिकà¥à¤·à¤¾ निकेतन इणà¥à¤Ÿà¤° कालेज, बेनाà¤à¤¾à¤¬à¤°, कानपà¥à¤°
6. सेठमोतीलाल खेड़िया सनातन धरà¥à¤® इणà¥à¤Ÿà¤° कालेज, विषà¥à¤£à¥à¤ªà¥à¤°à¥€ कानपà¥à¤°
7. बी.à¤à¤¨.à¤à¤¸.डी. शिकà¥à¤·à¤¾ निकेतन बालिका विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯, मेसà¥à¤Ÿà¤¨ रोड, कानपà¥à¤°
8. दà¥à¤°à¥à¤—ावती दà¥à¤°à¥à¤—ापà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ सनातन धरà¥à¤® बालिका इणà¥à¤Ÿà¤° कालेज, आजाद नगर, कानपà¥à¤°
9. बी.à¤à¤¨.à¤à¤¸.डी. शिकà¥à¤·à¤¾ निकेतन पà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤®à¤°à¥€ विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯
10. शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¤à¥€ नारायणी देवी सनातन धरà¥à¤® विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯, तातà¥à¤¯à¤¾à¤—ंज, कानपà¥à¤°
शà¥à¤°à¥€ सनातन धरà¥à¤® औषधालय, कानपà¥à¤° - शà¥à¤°à¥€ बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤µà¤°à¥à¤¤ सनातन धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤² के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सनॠ1917 ई. में मेसà¥à¤Ÿà¤¨ रोड में à¤à¤• आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• औषधालय की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ की गई थी, जो कà¥à¤¶à¤² वैदà¥à¤¯ आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥à¤¯ पं. संजय देव जी की देख-रेख में सà¥à¤šà¤¾à¤°à¥‚ रूप से चलता रहा।
धरà¥à¤® पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° कारà¥à¤¯ - सनातन धरà¥à¤® की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ा और पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° ही सनातन धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤² की सà¥à¤¥à¤ªà¤¨à¤¾ का मà¥à¤–à¥à¤¯ उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ रहा है। महामणà¥à¤¡à¤² के कारà¥à¤¯ अपने à¤à¤µà¤¨ में समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो सकें, इस हेतॠधरà¥à¤®à¤¶à¥€à¤² महानà¥à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ के पà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨à¥‹à¤‚ से à¤à¤• बड़े à¤à¤µà¤¨ की रचना की गई, जिसका शिलानà¥à¤¯à¤¾à¤¸ कारà¥à¤¤à¤¿à¤• शà¥à¤•à¥à¤² 13 संवतॠ1974 तदनà¥à¤¸à¤¾à¤° 26 नवमà¥à¤¬à¤°, 1917 को धरà¥à¤®à¤¾à¤²à¤‚कार रायबहादà¥à¥‚र बाबू विकà¥à¤°à¤®à¤¾à¤œà¥€à¤¤ सिंह जी के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हà¥à¤† था। कालानà¥à¤¤à¤° में सनà¥à¤¤-महातà¥à¤®à¤¾à¤“ं के पà¥à¤°à¤µà¤šà¤¨ à¤à¤µà¤‚ उपदेश, उचà¥à¤š कोटि के विदà¥à¤µà¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ के à¤à¤¾à¤·à¤£, सापà¥à¤¤à¤¾à¤¹à¤¿à¤•-पाकà¥à¤·à¤¿à¤• à¤à¤µà¤‚ मासिक कीरà¥à¤¤à¤¨, शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¦à¥à¤à¤—वदà¥à¤—ीता, रामायण, शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¦à¥à¤à¤¾à¤—वतकथा आदि कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®à¥‹à¤‚ का आयोजन उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤ªà¥‚रà¥à¤µà¤• समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होने लगा। तब से लेकर आज तक सनातन धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤² धरà¥à¤® पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° हेतॠपूरी निषà¥à¤ ा से कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¶à¥à¥€à¤¾à¤² है।
सनातन धरà¥à¤® पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ालय à¤à¤µà¤‚ वाचनालय - धारà¥à¤®à¤¿à¤• साहितà¥à¤¯ के संकलन और पठन-पाठन की सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से सनातन धरà¥à¤® पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ालय à¤à¤µà¤‚ वाचनालय की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ की गई थी जिसमें धारà¥à¤®à¤¿à¤• पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ों का à¤à¤• अति विशाल संगà¥à¤°à¤¹ है।
गीता-रामायण परीकà¥à¤·à¤¾ - विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में रामायण और गीता के माधà¥à¤¯à¤® से धारà¥à¤®à¤¿à¤• संसà¥à¤•ारों की नींव डालने के उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ से अलग-अलग आयॠवरà¥à¤— के लिà¤, अलग-अलग परीकà¥à¤·à¤¾ पाठà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® नियोजित किये गये। तदनà¥à¤¸à¤¾à¤° सà¤à¥€ सà¥à¤•ूलों à¤à¤µà¤‚ कालेजों में ये परीकà¥à¤·à¤¾à¤à¤‚ आयोजित की जाने लगीं और उतà¥à¤¤à¥€à¤°à¥à¤£ विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को उपाधि पतà¥à¤° à¤à¤µà¤‚ पारितोषित à¤à¥‡à¤‚ट किये जाने लगे। तब से आज तक शà¥à¤°à¥€à¤—ीता रामायण परीकà¥à¤·à¤¾ विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में धरà¥à¤® à¤à¤µà¤‚ संसà¥à¤•ृति के मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को विकसित-पà¥à¤·à¥à¤ªà¤¿à¤¤-पलà¥à¤²à¤µà¤¿à¤¤ करने हेतॠसततॠपà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨à¤¶à¥€à¤² है।
इस महान धारà¥à¤®à¤¿à¤• आनà¥à¤¦à¥‹à¤²à¤¨ में कानपà¥à¤° ने à¤à¥€ अपना सहयोग पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया। यहाठà¤à¥€ कà¥à¤› धरà¥à¤®à¤¾à¤¨à¥à¤°à¤¾à¤—ी महानà¥à¤à¤¾à¤µ अपने पà¥à¤°à¤•ार धरà¥à¤® à¤à¤µà¤‚ संसà¥à¤•ृति के पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°-पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤° हेतॠतन-मन-धन से समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ हो गये। फलसà¥à¤µà¤°à¥‚प बीसवीं शताबà¥à¤¦à¥€ के पà¥à¤°à¤¥à¤® दशक की समापà¥à¤¤à¤¿ होते-होते नगर में शà¥à¤°à¥€ बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤µà¤°à¥à¤¤ सनातन धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤² की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ हो गयी। सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¾à¤¨à¤¨à¥à¤¦ जी (काशी) के सà¥à¤¯à¥‹à¤—à¥à¤¯ शिषà¥à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ दयाननà¥à¤¦ जी की अगà¥à¤°à¤—णà¥à¤¯ à¤à¥‚मिका में सनॠ1910 ई. में ‘शà¥à¤°à¥€ विकà¥à¤°à¤®à¤¾à¤œà¥€à¤¤ सिंह à¤à¤µà¤‚ शà¥à¤°à¥€ राम देवीपà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ ‘पूरà¥à¤£’ के समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ से सनातन धरà¥à¤® की रकà¥à¤·à¤¾ à¤à¤µà¤‚ उसके पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤° के महान पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किये गये। पà¥à¤°à¤¥à¤® विशà¥à¤µ यà¥à¤¦à¥à¤§ समापà¥à¤¤ होने के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ रायबहादà¥à¤° बाबू विकà¥à¤°à¤®à¤¾à¤œà¥€à¤¤ सिंह के नेतृतà¥à¤µ में सनातन धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤² के कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ का विसà¥à¤¤à¤¾à¤° होने लगा। सनॠ1917 में सनातन धरà¥à¤® à¤à¤µà¤¨ निरà¥à¤®à¤¿à¤¤ कराया गया तथा सनातन धरà¥à¤® के पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° के लिठअनेक महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ à¤à¤µà¤‚ धारà¥à¤®à¤¿à¤• आयोजनों का आयोजन होने लगा। महामणà¥à¤¡à¤² की नींव जिन सà¥à¤¤à¤®à¥à¤à¥‹à¤‚ पर निरà¥à¤®à¤¿à¤¤ हà¥à¤ˆ उनमें पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के वरिषà¥à¤ अधिवकà¥à¤¤à¤¾ राय बहादà¥à¤° विकà¥à¤°à¤®à¤¾à¤œà¥€à¤¤ सिंह, सà¥à¤ªà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ अधिवकà¥à¤¤à¤¾, कवि और साहितà¥à¤¯à¤•ार शà¥à¤°à¥€ राय देवी पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ ‘पूरà¥à¤£’, साहितà¥à¤¯à¤•ार पं. पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ª नारायण मिशà¥à¤° पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¤¾à¤¯à¥€ रायविशमà¥à¤à¤°à¤¨à¤¾à¤¥, धरà¥à¤®à¤¨à¤¿à¤·à¥à¤ पं. दà¥à¤°à¥à¤—ापà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ बाजपेयी आदि पà¥à¤°à¤®à¥à¤– थे। अपने जनà¥à¤® काल से आज पà¥à¤°à¤¥à¤® शताबà¥à¤¦à¥€ के समापन तक यह सनातन धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤² शैकà¥à¤·à¤¿à¤• उनà¥à¤¨à¤¯à¤¨, धरà¥à¤® पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°, चिकितà¥à¤¸à¤¾ सेवा इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ के लिठसमरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं के माधà¥à¤¯à¤® से अपने पावन उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯à¥‹à¤‚ की पूरà¥à¤¤à¤¿ हेतॠसतत पà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨à¤¶à¥€à¤² है। शिकà¥à¤·à¤¾ के पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°-पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤° तथा à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति के अनà¥à¤°à¥‚प गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ पूरà¥à¤£ शिकà¥à¤·à¤¾ के लिठउसकी खà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ में ही नहीं वरनॠसमà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ देश में फैल गई है।
सनातन धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤² का कारà¥à¤¯ तीन à¤à¤¾à¤—ों में विà¤à¤•à¥à¤¤ है-
1: शिकà¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°
2: चिकितà¥à¤¸à¤¾
3: धरà¥à¤® पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° कारà¥à¤¯
शिकà¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° - ‘देश में पà¥à¤°à¤µà¤°à¥à¤¤à¤¿à¤¤ होने वाले नवजागरण के अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤—त नूतन-पदà¥à¤§à¤¤à¤¿ की शिकà¥à¤·à¤¾ में सनातन मानव धरà¥à¤® की शिकà¥à¤·à¤¾ को à¤à¥€ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ दिया जाये, जिससे हमारी सांसà¥à¤•ृतिक कà¥à¤·à¤¤à¤¿ न हो तथा हम अपनी पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ गौरवपूरà¥à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ परमà¥à¤ªà¤°à¤¾à¤“ं की दिवà¥à¤¯ जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ को अखणà¥à¤¡ रूप में जागà¥à¤°à¤¤ रख सकें। इस उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ से सनातन धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤² के अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤—त शिशॠककà¥à¤·à¤¾ से लेकर महाविदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ सà¥à¤¤à¤° तक अनेक शिकà¥à¤·à¤£ संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं के माधà¥à¤¯à¤® से संसà¥à¤•ारसमà¥à¤®à¤¤ शिकà¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करने का गà¥à¤°à¥à¤¤à¤° दायितà¥à¤µ समà¥à¤¯à¤•ॠरूप से संचालित किया जा रहा है। शà¥à¤°à¥€ बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤µà¤°à¥à¤¤ सनातन धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤² दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ संचालित शिकà¥à¤·à¤£ संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं की समाज में अपनी विशिषà¥à¤Ÿ पहचान है। पà¥à¤°à¤®à¥à¤– शिकà¥à¤·à¤£ संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं के नाम निमà¥à¤¨à¤µà¤¤à¥ उलà¥à¤²à¤¿à¤–ित हैं -
1. सनातन धरà¥à¤® विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯, मेसà¥à¤Ÿà¤¨ रोड, कानपà¥à¤°
2. विशà¥à¤µà¤®à¥à¤à¤° नाथ सनातन धरà¥à¤® इणà¥à¤Ÿà¤°à¤®à¥€à¤¡à¤¿à¤à¤Ÿ कालेज, चà¥à¤¨à¥à¤¨à¥€à¤—ंज, कानपà¥à¤°
3. विकà¥à¤°à¤®à¤¾à¤œà¥€à¤¤ सिंह सनातन धरà¥à¤® महाविदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯, नवाबगंज, कानपà¥à¤°
4. पं. दीनदयाल उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ सनातन धरà¥à¤® विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ इणà¥à¤Ÿà¤° कालेज, नवाबगंज, कानपà¥à¤°
5. बी.à¤à¤¨.à¤à¤¸.डी. शिकà¥à¤·à¤¾ निकेतन इणà¥à¤Ÿà¤° कालेज, बेनाà¤à¤¾à¤¬à¤°, कानपà¥à¤°
6. सेठमोतीलाल खेड़िया सनातन धरà¥à¤® इणà¥à¤Ÿà¤° कालेज, विषà¥à¤£à¥à¤ªà¥à¤°à¥€ कानपà¥à¤°
7. बी.à¤à¤¨.à¤à¤¸.डी. शिकà¥à¤·à¤¾ निकेतन बालिका विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯, मेसà¥à¤Ÿà¤¨ रोड, कानपà¥à¤°
8. दà¥à¤°à¥à¤—ावती दà¥à¤°à¥à¤—ापà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ सनातन धरà¥à¤® बालिका इणà¥à¤Ÿà¤° कालेज, आजाद नगर, कानपà¥à¤°
9. बी.à¤à¤¨.à¤à¤¸.डी. शिकà¥à¤·à¤¾ निकेतन पà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤®à¤°à¥€ विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯
10. शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¤à¥€ नारायणी देवी सनातन धरà¥à¤® विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯, तातà¥à¤¯à¤¾à¤—ंज, कानपà¥à¤°
शà¥à¤°à¥€ सनातन धरà¥à¤® औषधालय, कानपà¥à¤° - शà¥à¤°à¥€ बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤µà¤°à¥à¤¤ सनातन धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤² के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सनॠ1917 ई. में मेसà¥à¤Ÿà¤¨ रोड में à¤à¤• आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• औषधालय की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ की गई थी, जो कà¥à¤¶à¤² वैदà¥à¤¯ आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥à¤¯ पं. संजय देव जी की देख-रेख में सà¥à¤šà¤¾à¤°à¥‚ रूप से चलता रहा।
धरà¥à¤® पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° कारà¥à¤¯ - सनातन धरà¥à¤® की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ा और पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° ही सनातन धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤² की सà¥à¤¥à¤ªà¤¨à¤¾ का मà¥à¤–à¥à¤¯ उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ रहा है। महामणà¥à¤¡à¤² के कारà¥à¤¯ अपने à¤à¤µà¤¨ में समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो सकें, इस हेतॠधरà¥à¤®à¤¶à¥€à¤² महानà¥à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ के पà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨à¥‹à¤‚ से à¤à¤• बड़े à¤à¤µà¤¨ की रचना की गई, जिसका शिलानà¥à¤¯à¤¾à¤¸ कारà¥à¤¤à¤¿à¤• शà¥à¤•à¥à¤² 13 संवतॠ1974 तदनà¥à¤¸à¤¾à¤° 26 नवमà¥à¤¬à¤°, 1917 को धरà¥à¤®à¤¾à¤²à¤‚कार रायबहादà¥à¥‚र बाबू विकà¥à¤°à¤®à¤¾à¤œà¥€à¤¤ सिंह जी के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हà¥à¤† था। कालानà¥à¤¤à¤° में सनà¥à¤¤-महातà¥à¤®à¤¾à¤“ं के पà¥à¤°à¤µà¤šà¤¨ à¤à¤µà¤‚ उपदेश, उचà¥à¤š कोटि के विदà¥à¤µà¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ के à¤à¤¾à¤·à¤£, सापà¥à¤¤à¤¾à¤¹à¤¿à¤•-पाकà¥à¤·à¤¿à¤• à¤à¤µà¤‚ मासिक कीरà¥à¤¤à¤¨, शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¦à¥à¤à¤—वदà¥à¤—ीता, रामायण, शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¦à¥à¤à¤¾à¤—वतकथा आदि कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®à¥‹à¤‚ का आयोजन उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤ªà¥‚रà¥à¤µà¤• समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होने लगा। तब से लेकर आज तक सनातन धरà¥à¤® महामणà¥à¤¡à¤² धरà¥à¤® पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° हेतॠपूरी निषà¥à¤ ा से कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¶à¥à¥€à¤¾à¤² है।
सनातन धरà¥à¤® पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ालय à¤à¤µà¤‚ वाचनालय - धारà¥à¤®à¤¿à¤• साहितà¥à¤¯ के संकलन और पठन-पाठन की सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से सनातन धरà¥à¤® पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ालय à¤à¤µà¤‚ वाचनालय की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ की गई थी जिसमें धारà¥à¤®à¤¿à¤• पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ों का à¤à¤• अति विशाल संगà¥à¤°à¤¹ है।
गीता-रामायण परीकà¥à¤·à¤¾ - विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में रामायण और गीता के माधà¥à¤¯à¤® से धारà¥à¤®à¤¿à¤• संसà¥à¤•ारों की नींव डालने के उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ से अलग-अलग आयॠवरà¥à¤— के लिà¤, अलग-अलग परीकà¥à¤·à¤¾ पाठà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® नियोजित किये गये। तदनà¥à¤¸à¤¾à¤° सà¤à¥€ सà¥à¤•ूलों à¤à¤µà¤‚ कालेजों में ये परीकà¥à¤·à¤¾à¤à¤‚ आयोजित की जाने लगीं और उतà¥à¤¤à¥€à¤°à¥à¤£ विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को उपाधि पतà¥à¤° à¤à¤µà¤‚ पारितोषित à¤à¥‡à¤‚ट किये जाने लगे। तब से आज तक शà¥à¤°à¥€à¤—ीता रामायण परीकà¥à¤·à¤¾ विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में धरà¥à¤® à¤à¤µà¤‚ संसà¥à¤•ृति के मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को विकसित-पà¥à¤·à¥à¤ªà¤¿à¤¤-पलà¥à¤²à¤µà¤¿à¤¤ करने हेतॠसततॠपà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨à¤¶à¥€à¤² है।
सà¤à¤¾à¤ªà¤¤à¤¿
| राय देवी पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ जी ‘पूरà¥à¤£’ | सनॠ1910 से 1914 तक |
| पं0 दà¥à¤°à¥à¤—ा पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ जी बाजपेई | सनॠ1914 से 1916 तक |
| राय बहादà¥à¤° बाबू विकà¥à¤°à¤®à¤¾à¤œà¥€à¤¤ सिंह जी | सनॠ1916 से 1941 तक |
| पं0 गिरधर दास जी à¤à¤¾à¤°à¥à¤—व | सनॠ1941 से 1951 तक |
| शà¥à¤°à¥€ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¿à¤•ा पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ सिंह जी | सनॠ1951 से 1956 तक |
| शà¥à¤°à¥€ नरेनà¥à¤¦à¥à¤° जीत सिंह जी | सनॠ1956 से 1993 तक |
| शà¥à¤°à¥€ राम बालक मिशà¥à¤° | सनॠ1993 से जून 2013 तक |
| शà¥à¤°à¥€ कृषà¥à¤£ गोपाल लाहोटी | सनॠ2013 से जून 2014 तक |
| शà¥à¤°à¥€ हरिकृषà¥à¤£ सेठ| सनॠ2014 से जून 2014 तक |
| शà¥à¤°à¥€ वीरेनà¥à¤¦à¥à¤°à¤œà¥€à¤¤ सिंह | जून 2014 से |
कारà¥à¤¯à¤•ारिणी समिति
| कà¥à¤°.स. | नाम | पद | पता | दूरà¤à¤¾à¤· |